अरबी-21 अख़बार के मुताबिक, एम्नेस्टी इंटरनैश्लन ने अपने बयान में कहा है कि ख़ाशुक़्जी हत्या मामले के मुल्ज़िमों के मुक़दमे की कार्यवाही साफ़ सुथरी नहीं थी। इस संगठन ने आगे कहा कि मुक़दमे में यह बात स्पष्ट नहीं है कि ख़ाशुक़्जी का शव कहाँ गया।
ग़ौरतलब है कि न्यायिक दायरे से बाहर होने वीली हत्या के मामले की रैपोर्टर या प्रतिवेदक एग्नस कलामर्ड ने भी पिछले सोमवार को ख़ाशुक़्जी मामले में अदालत के हुक्म को, अदालत का मज़ाक़ बताया और कहा कि ख़ाशुक़्जी हत्या मामले के मुल्ज़िमों के ख़िलाफ़ मुक़दमे की प्रक्रिया में न्याय और पारदर्शिता नहीं थी।
सऊदी अटॉर्नी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि ख़ाशुक़्जी हत्या के जुर्म में व्यक्तिगत आपारधिक आयाम, उनके परिवार के सदस्यों की ओर से माफ़ कर दिए जाने से ख़त्म हो गया जबकि इस मामले के सामूहिक आयाम में 5 लोगों को 20 साल, एक शख़्स को 7 साल और 2 लोगों को 10 साल क़ैद की सज़ा दी गयी।
सऊदी अटॉर्नी ने इस हुक्म को आख़िरी बताया और इसका लागू होना अनिवार्य कहा।
ग़ौरतलब है कि जमाल ख़ाशुक़्जी के बच्चों ने जो सऊदी अरब में हैं, 22 मई को एलान किया कि उन्होंने अपने बाप के क़ातिल को माफ़ कर दिया है। उनकी ओर से इस एलान को सऊदी शासन की ओर से पर्दे के पीछे डाले गए दबाव का नतीजा माना जा रहा है। जबसे ख़ाशुक़्जी की हत्या हुयी है, उस वक़्त से उनके बच्चों पर सऊदी अरब से निकलने पर रोक लग गयी है।
ग़ौरतलब है कि जमाल ख़ाशुक़्जी को 2 अक्तूबर 2018 को तुर्की के इस्तांबूल शहर में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में बहुत ही बर्बरता से क़त्ल करके उनकी लाश के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए।